‘हास्यचूड़ामणि’ का मंचन: व्यंग्य, हास्य और ठहाकों की शानदार संध्या

रविंद्र भवन में रंग आलाप नाट्य महोत्सव में हुआ विहान ड्रामा वर्क्स का बहुचर्चित नाटक — हाउसफुल शो में दर्शकों ने हँसते-हँसते कहा: “और देखना है!”

भोपाल के रंग प्रेमियों के लिए आज की शाम अविस्मरणीय रही। 21वें रंग आलाप नाट्य महोत्सव के अंतर्गत रविंद्र भवन में विहान ड्रामा वर्क्स द्वारा प्रस्तुत सौरभ अनंत निर्देशित नाटक ‘हास्यचूड़ामणि’ ने दर्शकों को हँसी के समंदर में डुबो दिया।

महामात्य वत्सराज की 11वीं सदी की संस्कृत प्रहसन को बुंदेली लोक रंग में ढालकर मंच पर लाना जितना चुनौतीपूर्ण था, उतना ही दर्शनीय भी सिद्ध हुआ। पाखंड, लोभ पर तीखा व्यंग्य कसते इस नाटक ने दर्शकों को न केवल गुदगुदाया, बल्कि सोचने पर भी मजबूर किया। शो के दौरान ठहाकों से गूंजता सभागार कई बार तालियों से भर उठा।

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